萌学园
科学家对质子的康普顿散射进行新的测量_我的网站

一 | जागरण संवाददाता, सहारनपुर। सहारनपुर में जाहरवीर गोगा जी महाराज की म्हाड़ी का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है और यह उत्तर भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यह म्हाड़ी गंगोह रोड पर मानकमऊ में स्थित है और इसे गुघाल मेले के नाम से भी जाना जाता है। यह मेला हिंदू-मुस्लिम एकता और सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक माना जाता है। इस बार यह मेला पांच सितंबर से शुरू होगा।,भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की दशमी से होता है तीन दिवसीय मेले का आयोजन यहां हर वर्ष भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की दशमी को तीन दिवसीय मेला आयोजित होता है, जिसमें राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लाखों श्रद्धालु निशान और प्रसाद चढ़ाने आते हैं। गत चार अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाबा जाहरवीर गोगा म्हाडी मंदिर में आकर पूजा-अर्चना की थी। दो से चार अगस्त तक म्हाड़ी मेला और पांच सितंबर से मेला गुघाल का आयोजन होगा। ,जाहरवीर गोगाजी का परिचय जाहरवीर गोगा जी, जिन्हें गोगा पीर, जाहर पीर या गोगा चौहान के नाम से भी जाना जाता है, एक लोकदेवता और वीर योद्धा थे। उनका जन्म राजस्थान के चुरू जिले के ददरेवा गांव में विक्रम संवत 1003 (लगभग 946 ई.) में हुआ था। उनके पिता राजा जेवर सिंह और माता बाछल थीं, जो सरसावा (सहारनपुर) के राजा कुंवरपाल की पुत्री थीं। इस कारण सरसावा को उनकी ननिहाल माना जाता है।,म्हाड़ी की स्थापना ऐसा माना जाता है कि गोगा जी सहारनपुर आए थे और गंगोह रोड पर रुके थे। उन्होंने अपने भक्त कबली भगत को मछली पकड़ने का कार्य छोड़कर पूजा करने का आदेश दिया और चांदी का नेजा (प्रतीक चिह्न) देकर म्हाड़ी की स्थापना कराई। यह म्हाड़ी राजस्थान के बागड़ से लाई गई ईंट से बनाई गई थी।,म्हाडी मेले का इतिहास सहारनपुर में गोगा म्हाड़ी का मेला लगभग 800-1000 वर्षों से आयोजित हो रहा है। यह राजस्थान के बागड़ के बाद दूसरा सबसे बड़ा गोगा मेला माना जाता है। माना जाता है कि लगभग 1450 साल पहले गोगा जी ने सहारनपुर में नेजा स्थापित किया था, जिसके बाद से छड़ियों के पूजन और मेले की परंपरा शुरू हुई। 26 छडियों के आगमन के साथ मेला शुरू होता है। नेजा गोगा जी का प्रतीक है। ,आस्था और परंपराएं श्रद्धालु यहां आटा, चना, गुड़, मिठाई, झंडा और छड़ियां चढ़ाते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नत यहां अवश्य पूरी होती है। गोगा जी को सांपों के देवता के रूप में भी पूजा जाता है, और लोग सर्पदंश से सुरक्षा के लिए उनकी प्रार्थना करते है। गोगा जी में हिंदू, सिख और मुस्लिम समुदाय समान रूप से आस्था रखते हैं। सहारनपुर का मेला इस साम्प्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है। मुस्लिम समुदाय उन्हें गोगा पीर के रूप में सम्मान देता है।。

二 | 这种知识有助于验证对核子(质子和中子)如何形成的科学理解,方法是将结果与核子的伽马射线散射的理论描述进行比较。物理学家称这种散射过程为核子康普顿散射。

三 | 当科学家在电磁反应占主导地位的距离和规模上检查质子时,他们可以高精度地确定电磁极化率的值。为了做到这一点,他们使用有效场理论(EFT)的理论框架。EFT有希望将低能量下的核子结构描述与当前的强核力理论(称为量子色动力学,QCD)相匹配。在这项研究中,科学家们利用质子康普顿散射验证了EFT。这种方法也验证了支撑EFT的框架和方法。质子康普顿散射是科学家从氢目标(在本例中是液体目标)散射圆偏振或线偏振伽马射线,然后测量散射伽马射线的角度分布的过程。高能伽马射线携带足够强的电磁场,使核子中的电荷和电流的反应变得很重要。在这项研究中,科学家们在三角大学核实验室的高强度伽马射线源(HIGS)对质子的康普顿散射进行了新的测量。这项工作为使用偏振伽马射线在低能量下的质子的康普顿散射提供了一种新的实验方法。该研究推进了在HIGS进行新的高精度测量的需要,以提高质子和中子偏振率测定的准确性。这些测量验证了将核子的低能描述与QCD联系起来的理论。

四 |
Current article:http://p1xhbtn.xiongpeiduanlouduoennongleng.cyou/9vp/93r06s.html
Published on:00:54:21
知乎
神盾局特工
一拳超人
太极张三丰
流星蝴蝶剑
东方朔
恶作剧之吻
荆棘鸟













